Friday, 10 January 2014

कभी कभी मेरे दिल में (1)


1.

लगता हैं कभी,
के चलके आ जाये वह रात, जो बरामदें में पडी है,
थामें मेरा हाथ और हम चल पड़े, सुनसान राह पर...

जहाँ दिन कभी गले ना लगा सका,
वहाँ लपेट ले, यह रात
मिला ले कुछ कदम मेरे खुरदरे पैरों के साथ.. बिना पुछे मुझसे
के जाना कहाँ है और चलना कब तक?

लगता हैं कभी... बस यूँही

-बागेश्री

2 comments:

  1. class.
    It is as if the immortal lyrics of Sahir being written afresh by Gulzar !
    Touching yet tempting..
    Liked hugely.

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